“नवधा
शब्दब्रह्म” एव “तुंकार”
भगवान शिव माँ पार्वती जी को
बताते हैं- रात में जब सब सो जाये अंधकार में योग धारण करे| तर्जनी उंगली से दोनों
कानो को बंद करके दो घडी तक दबाए रखे| इस अवस्था में अग्नि प्रेरित शब्द सुनाई
देता हैं| योगाभ्यास द्वारा सुनने के प्रयत्न पर भी जब योगी इस शब्द को नहीं सुन
पाता, तब भी वह दिन रात अभ्यास में लगा रहे| ऐसा करने से सात दिन में वह शब्द
प्रकट होता हैं, जो मृत्यु को जीतने वाला हैं|
यह शब्दब्रह्म न ओंकार हैं, न
मन्त्र हैं, न बीज हैं, न अक्षर हैं| यह अनाहत (बिना आघात के अथवा बिना बजाये ही
प्रकट होने वाला शब्द) हैं| इसका उच्चारण किये बिना ही चिंतन होता हैं| इस शब्द- “जैसे आकाश में वर्षा से
युक्त बादल गरजता हैं” को सुनकर योगी तत्काल संसार बंधन से छूट जाता हैं| तदन्तर
योगियों द्वारा प्रतिदिन इस शब्द के चिंतन करने से यह सूक्ष्म से सूक्ष्मतर हो
जाता हैं|
शब्दब्रह्म नो प्रकार के हैं –
- घोष- सबसे पहले घोषात्मक नाद प्रकट होता हैं, जो आत्म
शुद्धि का उत्तम साधन हैं| यह उत्तम नाद सब रोगों को हर लेने वाला तथा मन को
वशीभूत कर अपनी ओर खीचने वाला हैं|
- कास्य नाद- दूसरा नाद कास्य नाद हैं, जो प्राणियों की
गति को स्थम्भित करता हैं| यह विष, भूत, और ग्रह आदि सबको को बांधता हैं|
- श्रृंग नाद- यह अभिचार से सम्बन्ध रखने वाला हैं|
- घंटा नाद- चौथा नाद घंटा नाद हैं जिसका उच्चारण
साक्षात् शिव करते हैं| यह नाद सम्पूर्ण देवताओं को भी आकृष्ट कर लेता हैं,
फिर भूतल के मनुष्यों की तो बात ही
क्या हैं|
- वीणा- पांचवा नाद वीणा नाद हैं जिससे दूरदर्शन की
शक्ति प्राप्त होती हैं|
- वंशी नाद- इस नाद का ध्यान करने वाले योगी को सम्पूर्ण
तत्व प्राप्त हो जाता हैं|
- दुन्दुभी नाद- इस नाद का चिंतन करने
वाला साधक ज़रा और मृत्यु के कष्ट से छूट जाता हैं|
- शंख नाद- शंख नाद का अनुसन्धान होने पर इच्छा अनुसार रूप
धारण करने की शक्ति प्राप्त हो जाती हैं|
- मेघ नाद- के चिंतन से योगी को कभी विपत्ति का सामना
नहीं करना पड़ता |
भगवान शिव कहते हैं कि इन नो
शब्दों के चिंतन से बढ़कर कर “तुंकार” का अभ्यास हैं | शिव पार्वति माँ को बताते हैं कि प्रतिदिन
एकाग्रचित से ब्रह्मरुपी “तुंकार” का ध्यान करते हैं, उसके लिए कुछ भी असाध्य नहीं होता हैं|
उसे मनोवांछित सिद्धि प्राप्त हो जाती हैं| वह सर्वज्ञ, सर्वदर्शी होकर सर्वत्र
विचरण करता हैं, कभी विकारों के वशीभूत नहीं होता| वह साक्षात शिव ही हैं, इसमें
संशय नहीं हैं|
हर....हर ....महादेव!!!!! हर ..हर ...महादेव!!!!!!!!!!